नवीन कुमार लाटकर/ बीजापुर -: पाठकों को बताते चलें कि कथित जनपद पंचायत भ्रष्टाचार के संदर्भ में सोशल मीडिया में वायरल टेक्स मेसेज से तिलमिला सीईओ एवं जनपद पंचायत का नाम तक अंकित नहीं हैं बावजूद इसके मेसेज से हैरान-परेशान मुख्यालय जनपद पंचायत सीईओ मेसेज से बौखला गया । ज्ञातव्य हो कि बीजापुर आदिवासी बहुल जिला हैं । यहां के ग्राम पंचायतों के विकास में रोजगार मूलक कार्य एवं सरकार से संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीन स्तर में बेहतर क्रियान्वयन हेतु सरपंच सचिवों से आपसी सामंजस्य के साथ कर्तव्य सिद्धांत के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने वाले सीईओ के शिक्षा में अनुशासन और गुणवत्ता शिक्षा विकसित नजर नहीं आया बल्कि ईर्ष्या ग्लानि
अहंकार घमंड अमानुषिक द्वेषपूर्ण व्यवहार संकुचित मानसिकता में नकारात्मक शिक्षा कूट-कूटकर भरा हुआ सीईओ का ये चोलर वाला चेहरा किसी राजनीतिक दल के आईटी सेल से कम नहीं लगा । हालांकि शुरुआती दौर में सीईओ के बतो से काफी प्रभावित हो गया और उनका इज्जत किया जा रहा था लेकिन हो चापलूसी गिरोह का हिस्सा हैं । उन्होंने पत्रकार के लिए अनैतिक शब्दों का उपयोग कर स्वयं किस दर्जे के सीईओ हैं इस संदर्भ में अनैतिक का परिचय दिया है । खबर ऐसा ही हवा-हवाई में किसी को आहत करने के उद्देश्य से संपादित नहीं किया जा रहा हैं ।
क्या था टेक्स मेसेज ।
जनपद पंचायत सीईओ के आंखों के नीचे ढ़ोल में पोल कितना है हम बतायेंगे । यह था सोशल मीडिया में वायरल टेक्स मेसेज ।
इस मेसेज से तिलमिला सीईओ उत्तम शील का परिचय देने के बजाय पत्रकार के प्रति सीईओ के मन में क्षोभ घर कर लिया विवादग्रस्त शब्दों से पत्रकार को बदनाम करने के लिए ईर्ष्या और दुर्भाव से ब्लेकमेलिग जैसे अनैतिक शब्दों का उपयोग किया । मेसेज में न तो सीईओ का नाम उल्लेख हैं और न ही पदस्थ जनपद पंचायत का ज़िक्र है और न ही मेसेज का सीईओ से कोसों दूर तक कोई सरोकार नहीं हैं । मसलन जुगाड में काबिज सत्ता पोषित सीईओ में किसी के भावनाओं को समझने की अनुभव की कमी का नतीजा हैं । कहते है कोई ऐसा ही पत्रकार नहीं बनता हैं । उसके लिए मास्क कम्युनिकेशन का पढ़ाई करना पड़ता हैं । यहां हर को ऐसा ही पत्रकार बनकर गुम रहें हैं । इस लिहाज से जिलें के पत्रकारों को अनैतिक नजरों से देखने से बाज नहीं आ रहे हैं । जब भी सीईओ से आमना-सामना होता है तो तीखे शब्दों से प्रहार कर पत्रकार को ज़लील करने का काम करते हैं । किसी भी खबर में बयान लेने आफिस जाने से आफिस से गायब रहते हैं और नौकरी छोड़कर पत्रकार बनने की बात करते हैं । पत्रकार बनने से कौन रोकता है बनिए खबरों के सिलसिले में किसी आफिस का दस बार चक्कर लगाओगे तो पता चलेगा सरकारी नौकरी और पत्रकारिता में कितना फर्क हैं । इसकी बानगी सीईओ स्वयं हैं जिस जनपद में बैठ रहें है उस जनपद का दस चक्कर लगाने के बावजूद भी सीईओ का दर्शन दुर्लभ हैं । दर्शन हो भी गया तो कहते हैं अभी फुर्सत नहीं हैं कल या शाम के मुलाकात कर लेना या फिर शाम के आफिस तरफ आकर देख लेना नहीं होने पर फोन कर लेना । फोन करने से फ़ोन रिसीव करते नहीं जिनसे फायदा है उनका फोन रिसीव करते हैं । पत्रकार का फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझते हैं । इत्तफाक से आफिस में मिल गए तो दो चार पत्रकारों से एक साथ मुलाकात करने के बजाय अकेले पत्रकार को आफिस में बैठाकर उल्टे-सीधे अमर्यादित बातें उगलाने का प्रयास किया जाता है ताकि आफिस में लगाएं सीसी कैमरे में रिकार्ड कर फंसाया जा सके । जरा सोचिए सीईओ किसी प्रवृत्ति के है । इनसे सावधान रहें किसी भी तरह का उम्मीद मत करना किसी के हमदर्द नहीं हो सकतें । जिस कुर्सी में बैठते हैं वहां रोजाना समस्याएं लेकर पंचायतों से ग्रामीण एवं सरपंच सचिवों का आना-जाना लगा रहता है । उनके समस्याओं के पन्नों को उलट-पुलट करने में अलबत्ता सीईओ का स्मरण शक्ति कमजोर पड़ गया । जिसके चलते अच्छा बुरा का पहचान नहीं कर पा रहें हैं । सही होता तो पत्रकार के लिए अनैतिक शब्दों का चयन कदापि नहीं करतें । जनपद में पदस्थ उनके करीबी कर्मचारी नाम नहीं बताने और छापने के शर्त में बताया आफिस में लगाएं सीसी कैमरे से सीईओ का मोबाइल कन्केटिग किया गया है । आफिस में कौन आ रहा हैं कौन जा रहा है मोबाइल में देख सके । एक साथ दो से चार पत्रकार आफिस में रहने का मोबाइल में नजर आने से देर से आफिस जाते हैं । या फिर शाम छह बजे आफिस जाकर लगभग रात आठ बजे तक आफिस में बैठते हैं । इसकी पुष्टि बोलता बीजापुर नहीं कर सकता । बताओं भला किसे पागल कुत्ता काटा है जो रात आठ बजे सीईओ से मुलाकात करने जनपद जायेगा । जानबूझकर ऐसा किया जाता हैं ताकि रोजाना पत्रकार सीईओ का चक्कर लगते रहें या फिर थक-हारकर जनपद पंचायत जाना ही बंद करे । इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है एक पत्रकार को बदनाम करने की नियत से अनैतिक शब्दों का उपयोग कर धमकाया जाता है तो फिर जनपद पंचायत में सरकारी काम लेकर जाने वाले पढ़े-लिखे आदिवासी युवक युवती अशिक्षित और दीन दुखी लोग से मुलाकात होता भी हैं तो उनके साथ कैसे बर्ताव किया जाता होगा । ऐसा जान पड़ रहा हैं वायरल टेक्स मेसेज से बौखला गया सीईओ जनपद पंचायत में गुपचुप तरीके से बड़े पैमाने में सरकारी धन का हेरा-फेरी करने की बु आ रही है ।
